हिंदी व्याकरण और वर्ण विचार
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हिंदी व्याकरण : परिचय
व्याकरण वह शास्त्र है जो भाषा के शुद्ध रूप (पढ़ने, लिखने और बोलने) का ज्ञान कराता है।
1. वर्ण विचार (Phonology)
भाषा की सबसे छोटी लिखित इकाई को वर्ण कहते हैं।
- स्वर (Vowels): स्वतंत्र रूप से बोले जाने वाले वर्ण। इनकी संख्या 11 है (अ से औ)।
- व्यंजन (Consonants): स्वरों की सहायता से बोले जाने वाले वर्ण। मूल संख्या 33 है।
- स्पर्श व्यंजन (25): 'क' वर्ग से 'प' वर्ग तक।
- अंतःस्थ व्यंजन (4): य, र, ल, व।
- ऊष्म व्यंजन (4): श, ष, स, ह।
2. शब्द विचार (Morphology)
प्रयोग के आधार पर शब्दों को दो मुख्य भेदों में बांटा गया है:
- विकारी शब्द: लिंग, वचन या काल के अनुसार जिनका रूप बदल जाता है। (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया)।
- अविकारी शब्द (अव्यय): जिनका रूप सदैव एक समान रहता है। (क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक)।
3. पद भेद (विकारी शब्द)
- संज्ञा (Noun): किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव का नाम। (मुख्य भेद: व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक)।
- सर्वनाम (Pronoun): संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द। (कुल 6 भेद)।
- विशेषण (Adjective): संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द।
- क्रिया (Verb): कार्य का करना या होना। (मुख्य भेद: सकर्मक और अकर्मक)।
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