हिंदी शब्द रचना और विकार

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हिंदी शब्द रचना और विकार

शब्दों की बनावट और उनमें होने वाले परिवर्तनों को शब्द रचना कहते हैं।

1. व्याकरणिक कोटियाँ

  • लिंग (Gender): हिंदी में दो लिंग होते हैं: पुल्लिंग (पुरुष जाति) और स्त्रीलिंग (स्त्री जाति)।
  • वचन (Number): एकवचन (एक संख्या) और बहुवचन (अधिक संख्या)। कुछ शब्द जैसे 'प्राण', 'हस्ताक्षर' सदैव बहुवचन होते हैं।
  • काल (Tense): कार्य के समय का बोध कराने वाले रूप। (वर्तमान, भूत और भविष्य)।

2. उपसर्ग और प्रत्यय

  • उपसर्ग (Prefix): वे शब्दांश जो शब्द के प्रारंभ (आदि) में जुड़कर उसका अर्थ बदल देते हैं।
  • प्रत्यय (Suffix): वे शब्दांश जो शब्द के अंत में जुड़ते हैं।
    • कृत्: क्रिया (धातु) के पीछे लगने वाले।
    • तद्धित: संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के पीछे लगने वाले।

3. संधि (Join)

दो वर्णों के मेल से होने वाले विकार को संधि कहते हैं।
  • स्वर संधि: दो स्वरों का मेल (जैसे: हिम + आलय = हिमालय)।
  • व्यंजन संधि: व्यंजन का व्यंजन या स्वर से मेल।
  • विसर्ग संधि: विसर्ग का मेल।

4. समास (Compound)

दो या दो से अधिक शब्दों के मेल को समास कहते हैं।
  • अव्ययीभाव: पहला पद प्रधान और अव्यय (जैसे: यथाशक्ति)।
  • तत्पुरुष: उत्तर पद प्रधान (जैसे: रसोईघर)।
  • द्विगु: प्रथम पद संख्यावाचक (जैसे: नवरत्न)।
  • द्वंद्व: दोनों पद प्रधान (जैसे: राम-लक्ष्मण)।
  • बहुव्रीहि: अन्य पद प्रधान (जैसे: लंबोदर - गणेश)।

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